Sunday, August 21, 2011

क्रांति का आग़ाज


इक पलकी न इक दिनकी 
यह बरसोंकी बात है,
आजादिकी धून नईसी
यह क्रांतिकी शुरुआत है |

पैसोंकी सब नशा है 
और सत्ताका  गुमान है ,
गम कहाँ,शर्म कहाँ ?
इनका बिक चुका ईमान है,
  बदलाव के अब बादल है,
  अरमानोंकी बरसात है ||
आज़ादीकी धून नईसी
यह क्रांतिकी शुरुआत है..

सच्चाई की कीमत कहाँ ?
बेईमानीका चलता राज,
नौजवान अब जाग उठे 
परिवर्तन का हो आग़ाज ,
  खुशहाली की सहर हो रही,
  ढलनेको काली रात है ||     
आज़ादीकी धून नईसी
यह क्रांतिकी शुरुआत है..

कठिनाईसे झुंज लेंगे 
निर्भयता का हाथ मिले,
लोकतंत्रके दहलीज पर 
नीतीमूल्योंके चराग़ जले,
  अब तो आँधी आनी है,
  पूरा भारत साथ है ||
आज़ादीकी धून नईसी
यह क्रांतिकी शुरुआत है..
                           - गौरव पांडे